गंभीर आरोपों के बीच भी नहीं डिगे आकाशदीप पचाया, असली हत्यारे को पहुंचाया जेल

माखननगर। नर्मदापुरम एसपी साईं कृष्णा एस. थोटा के निर्देशन एवं एसडीओपी संजू चौहान के मार्गदर्शन में माखननगर थाना प्रभारी उनि. आकाशदीप पचाया की सूझबूझ, तकनीकी विवेचना और दृढ़ नेतृत्व में पुलिस ने अंधी हत्या की गुत्थी सुलझली माखननगर थाना क्षेत्र के ग्राम फुरतला में 18 मई 2026 को हुई 70 वर्षीय रामबाई राजपूत की हत्या का ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए मृतका के सगे भतीजे राकेश राजपूत को गिरफ्तार कर लिया है। प्रथम दृष्टया यह मामला अंधी हत्या का प्रतीत हो रहा था, पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने जमीन और मकान हड़पने की नीयत से अपनी सगी बुआ की हत्या की थी। वारदात के बाद आरोपी इतना शातिर निकला कि वह खुद पुलिस जांच के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहा और लगातार पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखता रहा। वह स्वयं को निर्दोष साबित करने की कोशिश करता रहा, लेकिन उसके संदिग्ध व्यवहार और तकनीकी साक्ष्यों ने आखिरकार उसकी सच्चाई उजागर कर दी। अंधेरे का फायदा उठाकर दिया वारदात को अंजाम पुलिस के अनुसार घटना वाली रात आरोपी राकेश राजपूत चोरी-छिपे बागुड़ कूदकर रामबाई के घर के आंगन में घुसा था। आहट सुनकर रामबाई जाग गईं और उससे पूछताछ की। आरोपी ने बहाना बनाया कि उसे लगा वह सो रही होंगी, इसलिए दरवाजा नहीं खटखटाया। रात में बिजली गुल हो गई। अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी ने तकिए से बुजुर्ग महिला का मुंह दबा दिया। जब वह अचेत हो गईं तो आरोपी उन्हें आंगन से उठाकर घर के भीतर ले गया और वहां भी मुंह दबाए रखा, जिससे उनकी मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी ने घर में रखी पैरों की कड़ी, कानों के जेवर, बिछिया, 5 हजार रुपए नकद, जमीन की बही, मकान की रजिस्ट्री, शपथ पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड और हिसाब-किताब की डायरी सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज चुरा लिए। इसके बाद घर का दरवाजा बंद कर फरार हो गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस रिमांड में आरोपी को वंशीखैरी गांव के समीप नर्मदा घाट ले जाया गया। पूछताछ में उसने बताया कि चोरी किए गए जेवर और दस्तावेज उसने वहीं छिपाए थे। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर सामान बरामद कर लिया। जांच में सामने आया कि रामबाई राजपूत के पति का करीब एक वर्ष पूर्व निधन हो चुका था तथा उनकी कोई संतान नहीं थी। उनके नाम लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि और मकान था।आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसकी बुआ अन्य भतीजों को खाने-पीने की सामग्री देती थीं और समय-समय पर आर्थिक सहायता भी करती थीं, जबकि उसे कोई मदद नहीं मिलती थी। उसे आशंका थी कि बुआ अपनी संपत्ति दूसरे भतीजों के नाम कर सकती हैं। इसी कारण उसने हत्या की साजिश रची।
आरोपी ने पुलिस से बचने के लिए ली थी न्यायालय की शरण, पुलिस पर लगायें थे गंभीर आरोप, पर थाना प्रभारी उनि. आकाशदीप पचाया ने उतनी ही सफाई से कर दिया हत्याकांड का खुलासा
हत्याकांड में आरोपी राकेश राजपूत ने पुलिस जांच को भटकाने और स्वयं को निर्दोष साबित करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उसने न केवल पुलिस पर मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए, बल्कि न्यायालय में आवेदन और शपथ पत्र प्रस्तुत कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े करने की कोशिश भी की। पुलिस विभाग के भी वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें भेज जांच भटकाने का प्रयास किया।
लेकिन माखननगर थाना प्रभारी उपनिरीक्षक आकाशदीप पचाया ने इन सभी परिस्थितियों के बीच असाधारण धैर्य, सूझबूझ और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। उन्होंने भावनाओं या दबाव के बजाय केवल तथ्यों, तकनीकी साक्ष्यों और वैज्ञानिक विवेचना पर भरोसा रखा। साइबर सेल से प्राप्त जानकारी, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, आरोपी की गतिविधियों और उसके विरोधाभासी बयानों का गहन विश्लेषण कर जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाया। आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन आकाशदीप पचाया ने अपनी नेतृत्व क्षमता और विवेचना कौशल के दम पर मामले की एक-एक कड़ी को जोड़ते हुए सच्चाई तक पहुंच बनाई। आखिरकार वही व्यक्ति हत्या का मास्टरमाइंड निकला, जो खुद को पीड़ित बताकर पुलिस को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा था।यह मामला केवल एक अंधे हत्याकांड के खुलासे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब पुलिस अधिकारी निष्पक्षता, धैर्य और तकनीकी दक्षता के साथ कार्य करते हैं तो अपराधी की कितनी भी शातिर योजना और झूठे आरोप अंततः बेनकाब हो जाते हैं। फुरतला हत्याकांड का खुलासा थाना प्रभारी आकाशदीप पचाया के कुशल नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और साक्ष्य आधारित पुलिसिंग का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर सामने आया है।
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