सोहागपुर: वन्यप्राणी अपराध बढ़ने के आरोपों के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

सांभर के कथित शिकार मामले में चार पर कार्रवाई, लेकिन विभाग की चुप्पी ने खड़े किए कई सवाल

सोहागपुर// वन परिक्षेत्र सोहागपुर के ग्राम रोरीघाट में सांभर के मांस के मामले में वन विभाग द्वारा चार लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बाद अब विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। विभाग के अनुसार मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए चार लोगों को सांभर का मांस पकाते हुए पकड़ा गया तथा मौके से कच्चा-पका मांस, बर्तन, कुल्हाड़ी, बोरी और छुरी जब्त की गई। वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, इस पूरे मामले में कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

क्षेत्र में लगातार बढ़ते वन्यप्राणी अपराध, विभाग की चुप्पी पर खड़े हो रहे सवाल

क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे वन्यप्राणी अपराधों को लेकर वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर वन्यजीवों के शिकार और अन्य वन अपराधों की घटनाओं को लेकर विभाग की सक्रियता और निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा हो रही है। मीडियाकर्मियों को वन्यप्राणी अपराधों से जुड़े मामलों में विभाग के अधिकारियों से जानकारी हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। जब मीडियाकर्मि द्वारा सामान्य वन मंडल में पदस्थ रेंजर हेमंत शर्मा से घटना की जानकारी (व्हाइट) लेना चाह गया तो उन्होंने कहा कि हमें ऊपर से निर्देश नहीं है मीडिया से बात करने के आप ऊपर के अधिकारियों से चर्चा करें रेंज स्तर के अधिकारियों को भी मीडिया से सीधे बात नहीं करने के निर्देश हैं। ऐसे में किसी वन अपराध की वास्तविक स्थिति और विभाग की कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आने को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

डीएफओ से संपर्क की कोशिश, कॉल रिसीव नहीं होने का दावा

रोरीघाट में सांभर के कथित शिकार के इस मामले में मीडिया कर्मी द्वारा वनमंडलाधिकारी नर्मदापुरम से बार-बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, ताकि कार्रवाई, बरामद मांस, शिकार की जगह, खाल या अन्य अवशेष, और जांच की स्थिति को लेकर विभाग का आधिकारिक पक्ष जाना जा सके। लेकिन आरोप है कि डीएफओ ने कॉल रिसीव नहीं किया। ऐसे में सवाल यह है कि जब वन्यप्राणी अपराध जैसे गंभीर मामलों में विभाग कार्रवाई कर रहा है, तो मीडिया के सवालों का आधिकारिक जवाब देने से अधिकारी क्यों बच रहे हैं? क्या विभाग के पास इस मामले से जुड़े सभी सवालों के स्पष्ट जवाब हैं?

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