काली-लाल मिट्टी से भरे जा रहे साइड शोल्डर, बरसात में हादसों का बढ़ा खतरा

सड़क किनारे की मिट्टी से ही किया जा रहा शोल्डर भराव; स्थानीय लोगों ने गुणवत्ता जांच और स्थल निरीक्षण की उठाई मांग।

सोहागपुर// नर्मदापुरम-पिपरिया मुख्य मार्ग से मढ़ई जाने वाली सड़क पर चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। निभौरा ग्राम के समीप निभौरा नर्सरी के पास सड़क के साइड शोल्डर के फिलिंग में काली एवं लाल मिट्टी का उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह कार्य तकनीकी मानकों के विपरीत किया जा रहा है, जिससे आगामी बरसात में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। जानकारी के अनुसार सड़क के दोनों ओर शोल्डर निर्माण में लाल और काली मिट्टी डाली जा रही है। यह सड़क अभी ठेकेदार की गारंटी पीरियड में है आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सड़क किनारे की मिट्टी खोदकर उसी का उपयोग शोल्डर भराव में किया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक काली मिट्टी में पानी सोखने और फूलने की क्षमता अधिक होती है, जबकि लाल मिट्टी लगातार बारिश के दौरान कटाव का शिकार हो जाती है। ऐसे में मानसून शुरू होते ही साइड शोल्डर कीचड़युक्त और दलदली बन सकते हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की निगरानी और निरीक्षण में भी लापरवाही बरती जा रही है। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर कार्यों का भौतिक सत्यापन करने के बजाय कार्यालय में बैठकर तस्वीरों के आधार पर गुणवत्ता का आकलन कर रहे हैं। ठेकेदारों द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों के आधार पर ही कार्यों को स्वीकृति मिल रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।गौरतलब है कि यह मार्ग पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी सड़क से होकर पर्यटक प्रसिद्ध मढ़ई और सतपुड़ा क्षेत्र की यात्रा करते हैं। वर्षभर बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में यदि बरसात के दौरान साइड शोल्डर दलदल में तब्दील हो जाते हैं तो वाहनों के फिसलने और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराए, साइड शोल्डर निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग सुनिश्चित करे तथा अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना या जनहानि की स्थिति उत्पन्न न हो।

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