दुख की घड़ी में लिया मानवता का सबसे बड़ा फैसला, बंसल हॉस्पिटल में पहली बार मुस्लिम परिवार द्वारा अंगदान
संवाददाता:- शेख आरिफ।

भोपाल// इंसानियत, संवेदना और गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक प्रेरणादायक मिसाल राजधानी भोपाल में देखने को मिली, जहां एक मुस्लिम परिवार ने अपने प्रियजन को खोने के बाद भी मानवता को सर्वोपरि रखते हुए अंगदान कर तीन लोगों को नया जीवन दे दिया।
केरल निवासी स्वर्गीय सजना एस. ए. के परिजनों ने दुःख की इस कठिन घड़ी में साहस और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए उनके लिवर एवं किडनी दान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह अंगदान भोपाल के Bansal Hospital में संपन्न हुआ, जहां पहली बार किसी मुस्लिम परिवार द्वारा इस प्रकार का अंगदान किया गया। अंगदान के माध्यम से तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला। इस मानवीय पहल ने यह संदेश दिया कि धर्म और जाति से ऊपर उठकर मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
अंतिम विदाई में नम हुईं आंखें, पुलिस बल द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर दी गई श्रद्धांजलि

स्वर्गीय सजना एस. ए. को अंतिम विदाई के दौरान भावुक माहौल देखने को मिला। पुलिस बल द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अस्पताल परिसर में मौजूद चिकित्सकों, स्टाफ एवं परिजनों की आंखें नम हो गईं। यह क्षण न केवल अंगदान के महत्व को दर्शाने वाला था, बल्कि समाज में भाईचारे, प्रेम और मानवता की जीवंत मिसाल भी बन गया। Bansal Hospital ने अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में लगातार उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अस्पताल में अब तक 51 से अधिक सफल लिवर ट्रांसप्लांट और 510 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं, जिससे यह मध्य भारत में ट्रांसप्लांट सेवाओं का एक भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरा है।
यह प्रेरणादायक घटना समाज को अंगदान के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ यह संदेश भी देती है कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।
