सोहागपुर के किवलारी में भीषण सड़क हादसा: 1 की मौत, 5 घायल… और फिर खुल गई स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

रितू वेयरहाउस के सामने दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत, एंबुलेंस खराब होने से तड़पते रहे घायल — सवालों के घेरे में स्वास्थ्य प्रशासन और स्थानीय अधिकारी

सोहागपुर// किवलारी स्थित रितू वेयरहाउस के सामने रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने हुई जोरदार भिड़ंत में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि एक 62 वर्षीय बुजुर्ग ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया। निरीक्षण कर लौट रहे तहसीलदार रामकिशोर झरबड़े ने और डायल-112 ड्यूटी पर तैनात नरेंद्र भदोरिया और पायलट विक्रम ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोहागपुर पहुंचाया। यदि समय रेहते तहसीलदार अपनी गाड़ी से और डायल 112 से समय रहते अस्पताल भेजा राहत नहीं मिलती तो मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता था। घायलों में सुनील अहिरवार, दीपक अहिरवार, करण, पूनम ठाकुर और मुस्कान शामिल हैं, जिनका उपचार जारी है। वहीं दिमाड़ा निवासी 62 वर्षीय मुकुंदी ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

लेकिन इस हादसे ने केवल सड़क सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सोहागपुर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की भी भयावह तस्वीर सामने ला दी। गंभीर घायलों को जिला अस्पताल रेफर करने के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एंबुलेंस खराब मिली। सवाल यह है कि विधायक निधि से मिली आपातकालीन एंबुलेंस आखिर कब से बंद पड़ी थी? और उसका मेंटेनेंस कौन देख रहा था?
दुर्घटना में घायल मरीजों के अस्पताल पहुंचने के लगभग पौन घंटे बाद ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर रेखा गौर अस्पताल पहुंचीं। तब तक ड्यूटी डॉक्टर अकेले पांच गंभीर मरीजों का इलाज संभालते रहे। डॉ रेखा गौर के अस्पताल पहुंचने से पहले ही बुजुर्ग मुकुंदी की मौत हो चुकी थी।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आम जनता कब तक सरकारी लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाती रहेगी?
सोहागपुर में लगातार प्रशासनिक अव्यवस्थाओं को लेकर जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कहीं आरआई पर शपथपत्र के माध्यम से 20 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप लगते हैं, तो कहीं एसडीएम स्तर पर शिकायतों की जांच लंबित रखे जाने के आरोप सामने आते हैं। बिजली विभाग की अघोषित कटौती से परेशान जनता और सत्ता के लोगों को भी देर रात तक सड़क पर बैठना पड़ता है, और अब स्वास्थ्य सेवाओं की यह बदहाली लोगों के भरोसे को तोड़ रही है।
ऐसा प्रतीत होता है मानो जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। सवाल केवल एक हादसे का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जो हर घटना के बाद केवल जांच का आश्वासन देती है, लेकिन सुधार कहीं दिखाई नहीं देता।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। लेकिन इस हादसे ने सोहागपुर की प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

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