संत-महात्माओं के त्सान्निध्य में राज मैरिज गार्डन में हुआ भव्य स्वागत
संवाददाता:- शेख आरिफ।

सोहागपुर। माँ नर्मदा की पावन परिक्रमा पूर्ण कर अपने गृह मंडल सोहागपुर पहुंचे क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक विजयपाल सिंह के आगमन पर शनिवार को पूरा नगर भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर नजर आया। जैसे ही विधायक विजयपाल सिंह 108 परिक्रमा वासियों के साथ परिक्रमा यात्रा के अंतिम पड़ाव पर सोहागपुर पहुंचे, नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और माँ नर्मदा के जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया। पूरे नगर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। माँ नर्मदा परिक्रमा सनातन परंपरा की अत्यंत कठिन और पवित्र तपस्या मानी जाती है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, साधना और सेवा का अद्भुत संगम है। इसी पावन भावना के साथ की गई विधायक विजयपाल सिंह की परिक्रमा यात्रा को लेकर नगरवासियों में विशेष उत्साह और गर्व का माहौल रहा।
इस पावन अवसर पर परिक्रमा पर निकले परम पूज्य पंडित सोमेश परसाई जी के सान्निध्य में कार्यक्रम का आध्यात्मिक वातावरण और अधिक दिव्य हो उठा। उल्लेखनीय है कि इस नर्मदा परिक्रमा यात्रा में 108 परिक्रमावासी शामिल रहे, जिनका नगरवासियों ने श्रद्धापूर्वक स्वागत और सम्मान किया।

विधायक ठाकुर विजयपाल सिंह के साथ राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने भी मां नर्मदा की परिक्रमा की स्वागत सम्मान कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। नगर का मुख्य स्वागत समारोह राज मैरिज गार्डन, सोहागपुर में आयोजित किया गया, जहां शाम 7 बजे से श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। इस अवसर पर संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए परिक्रमावासियों का सम्मान किया गया तथा सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी वितरण का आयोजन भी किया गया। खास बात यह रही कि मुस्लिम समाज के लोगों ने भी परिक्रमा वासियों का भव्य स्वागत कर आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
पूरे नगर में माँ नर्मदा के जयकारों, भक्ति गीतों और श्रद्धा के भाव के बीच यह आयोजन एक आध्यात्मिक उत्सव के रूप में मनाया गया। नगरवासियों ने माँ नर्मदा से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। यह अवसर सोहागपुर के लिए आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन गया।
