संवाददाता:- शेख आरिफ।
सोहागपुर// मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से जुड़े एक मामले में आरोपियों को राहत देते हुए जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की एकलपीठ ने वन्यजीव मामले में सुनवाई करते हुए वर्ल्ड लाइफ नेचुरलिस्ट फैजान अंसारी और जरनल मैनेजर निपुण कुमार महतो की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। मामले के अनुसार, सोहागपुर स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के फोर्सिथ रिजॉर्ट के एक कमरे से वन्यजीवों से संबंधित कुछ वस्तुएं, जिनमें हिरण के सींग, सांप की खाल और साही के कांटे वन विभाग ने बरामद किए गए थे। इस आधार पर वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
सोहागपुर आरोपी पक्ष के अधिवक्ता प्रतीक तिवारी ने बताया कि सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह एवं अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा ने तर्क दिया कि बरामद वस्तुएं अधिनियम में परिभाषित “पशु वस्तु” की श्रेणी में नहीं आतीं और आवेदकों को झूठा फंसाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि आवेदकों ने जांच में पूरा सहयोग किया है और उन्हें लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है। वहीं, राज्य की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि बरामद सामग्री “ट्रॉफी” की श्रेणी में आती है, जिससे प्रथम दृष्टया अपराध बनता है और जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आया न्यायालय का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि इस स्तर पर यह तय करना आवश्यक नहीं है कि बरामद वस्तुएं “पशु वस्तु” हैं या “ट्रॉफी”। न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपित अपराधों में अधिकतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान है, आवेदक 15 मार्च 2026 से जेल में हैं तथा उनके फरार होने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने दोनों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक-एक जमानतदार पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्हें न्यायालय में निर्धारित तिथियों पर उपस्थित रहने एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रावधानों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
