सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों का खूनी संघर्ष, 4 माह के शावक की मौत

शाम को दहाड़ों से गूंजा जंगल, सुबह जांच में सामने आया टेरिटोरियल फाइट का मामला

नर्मदापुरम/मटकुली। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मटकुली वन परिक्षेत्र अंतर्गत बीट नयाखेड़ा के कक्ष क्रमांक 460 में बाघों के आपसी संघर्ष का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना में एक करीब 4 माह के बाघ शावक की मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार 4 अप्रैल 2026 की शाम को क्षेत्र में दो बाघों के जोरदार दहाड़ने की आवाज सुनाई दी। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वनरक्षक नयाखेड़ा, परिक्षेत्र सहायक और स्टाफ ने तत्काल गश्ती शुरू की। रात्रि के समय मौके के पास पहुंचने पर एक बाघ शावक मृत अवस्था में पाया गया। जिस की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई अंधेरा होने के कारण पूरी कार्रवाई अगले दिन तक स्थगित रखते हुए स्थल की निगरानी की गई।

जांच में मिले संघर्ष के पुख्ता सबूत
5 अप्रैल को विस्तृत निरीक्षण के दौरान घटनास्थल पर बाघों के बीच संघर्ष के स्पष्ट साक्ष्य मिले। क्षेत्र में नर और मादा बाघ के पदचिह्न पाए गए, जिससे अन्य बाघों की मौजूदगी की पुष्टि हुई। अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल की परिस्थितियां आपसी टकराव की ओर इशारा करती हैं। क्षेत्र संचालक, सहायक संचालक (पिपरिया एवं पचमढ़ी), तहसीलदार पिपरिया और NTCA प्रतिनिधि की उपस्थिति में निर्धारित SOP के तहत कार्रवाई की गई। पोस्टमार्टम डॉ. गुरुदत्त शर्मा (सतपुड़ा टाइगर रिजर्व) एवं डॉ. अमित ओढ़ (रातापानी टाइगर रिजर्व) द्वारा किया गया, जिसमें— शावक की उम्र लगभग 4 माह पाई गई । प्रथम दृष्टया मौत का कारण किसी अन्य मांसाहारी वन्यजीव का हमला बताया गया। मौके पर मिले नर एवं मादा बाघ के पदचिह्नों और संघर्ष के संकेतों के आधार पर यह माना जा रहा है कि शावक की मौत बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व (टेरिटोरियल फाइट) की वजह से हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में नर बाघ कई बार दूसरे शावकों को मार देते हैं। वन विभाग की निगरानी जारी घटना के बाद वन विभाग सतर्क है और क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह जंगल के प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है, फिर भी हर पहलू पर नजर रखी जा रही है।

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