नयागांव सरपंच प्रतिनिधि दीपक रघुवंशी बने ईमानदारी की मिसाल 3 लाख रुपए किये वापस

बैंक ऑफ इंडिया की भारी चूक, ईमानदारी पर चला दमन चक्र

तीन लाख की गलती बैंक की, धमकी सरपंच प्रतिनिधि दीपक रघुवंशी को

सोहागपुर// बैंक ऑफ इंडिया सोहागपुर शाखा की घोर लापरवाही ने बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। बैंक कर्मचारी की चूक से खाताधारक पवन वर्मा के खाते से ₹3,00,000 की राशि गलती से नयागांव सरपंच प्रतिनिधि दीपक रघुवंशी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। हैरानी की बात यह रही कि जिस व्यक्ति के खाते में गलती से पैसा पहुंचा, उसने लालच नहीं बल्कि ईमानदारी को चुना। सरपंच प्रतिनिधि दीपक रघुवंशी ने स्वयं पहल करते हुए तत्काल बैंक प्रबंधक से संपर्क किया और साफ शब्दों में कहा कि यह राशि वास्तविक खाताधारक को वापस की जाए।

ईमानदारी की सज़ा:- दीपक रघुवंशी ने बैंक से यह भी कहा कि उनके खाते पर बैंक द्वारा लगाए गए ₹6,00,000 के होल्ड को हटाया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हो सके। लेकिन आरोप है कि बैंक प्रबंधक ने सहयोग करने के बजाय अभद्र भाषा का प्रयोग किया और एफआईआर दर्ज कराने की धमकी तक दे डाली। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या बैंक में ईमानदारी अब अपराध बन चुकी है? निडर जनप्रतिनिधि, सिस्टम के सामने डटा:- धमकियों के बावजूद दीपक रघुवंशी अपने निर्णय पर अडिग रहे। खाताधारक पवन वर्मा को बैंक बुलाया गया और उनकी मौजूदगी में पूरी राशि वापस की गई। राशि मिलने पर पवन वर्मा ने दीपक रघुवंशी की इमानदारी की खुले तौर पर तारीफ की एवं धन्यवाद किया।

जनप्रतिनिधि बोले:— आम आदमी का क्या हाल होता होगा?घटना के बाद सरपंच प्रतिनिधि दीपक रघुवंशी ने बैंक प्रबंधक के व्यवहार पर नाराज़गी जताते हुए कहा— “जब मेरे जैसे जनप्रतिनिधि के साथ बैंक ऐसा व्यवहार कर सकता है, तो आम नागरिक के साथ क्या होता होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक प्रबंधक की शिकायत बैंक ऑफ इंडिया के उच्च अधिकारियों और हेड ऑफिस तक की जाएगी। यह मामला सिर्फ तीन लाख रुपये का नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की जवाबदेही, कर्मचारी व्यवहार और आम नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा है। वहीं दूसरी ओर, दीपक रघुवंशी की ईमानदारी ने यह साबित कर दिया कि आज भी व्यवस्था में नैतिकता ज़िंदा है—बस उसे दबाया जा रहा है।

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