प्रोटोकॉल के तहत किया गया पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार

सोहागपुर/नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना वन परिक्षेत्र में करीब 46 वर्षीय मादा हाथी ‘स्मिता’ की अचानक मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार हाथियों के जंगल से कैंप लौटने के दौरान स्ममता के शरीर पर चोट के निशान पाए गए थे। उसे तत्काल प्राथमिक उपचार और आवश्यक फर्स्ट एड दिया गया, जिसके बाद उसकी गतिविधियां, चलना-फिरना और भोजन ग्रहण करना सामान्य पाया गया था। लेकिन 10 अगस्त की शाम करीब 4 बजे स्ममता अचानक जमीन पर गिर गई और उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक घटनास्थल निरीक्षण और उपलब्ध जानकारी के आधार पर वन विभाग ने आशंका जताई है कि नर हाथी ‘कृष्णा’ के साथ संघर्ष के दौरान स्मिता घायल हुई हो सकती है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
पोस्टमार्टम में लिए गए वैज्ञानिक नमूने
मादा हाथी की मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए 11 अगस्त को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत वन्यप्राणी चिकित्सा दल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के दौरान आवश्यक वैज्ञानिक नमूने विधिवत एकत्र कर सुरक्षित किए गए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जाएगा। पोस्टमार्टम और सैंपलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्ममता को पुष्पमाला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसके शव के दाह संस्कार/भस्मीकरण की कार्रवाई पूरी की गई।
अधिकारियों और विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई


पूरी कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त नर्मदापुरम अशोक कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं उपस्थिति में की गई। मौके पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की उपसंचालक ऋषिमा सिंह नेताम, वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. गुरुदत्त शर्मा, वन्यप्राणी संरक्षण ट्रस्ट एवं एनटीसीए प्रतिनिधि डॉ. प्रशांत देशमुख, जबलपुर के पशु चिकित्सक डॉ. निधि राजपूत, वन्यप्राणी संरक्षण ट्रस्ट के डॉ. हमजा फारूखी, ग्राम पंचायत धपाड़ा की सरपंच यशोदा विनोद यादव और केसला तहसीलदार दिलीप सिंह परते सहित संबंधित अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्ममता की मौत के वास्तविक कारण पर अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रयोगशाला जांच के बाद ही सामने आएगा। वैज्ञानिक नमूनों को सुरक्षित रखा गया है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
