भोपाल के अपोलो सेज अस्पताल को भेजा गया कानूनी नोटिस

गलत निदान और गलत साइज का कास्ट लगाने का आरोप, पीड़िता ने मांगा 5 लाख रुपये मुआवजा

पत्रकार:- शेख आरिफ।

भोपाल (मध्य प्रदेश)// राजधानी भोपाल स्थित अपोलो सेज अस्पताल पर कथित मेडिकल लापरवाही, सेवा में कमी और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में जिरकपुर (मोहाली) निवासी हिमानी मक्कड़ की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन को कानूनी नोटिस भेजा गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हिमानी मक्कड़ 20 फरवरी 2026 को भोपाल में एक कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं। कार्यक्रम के दौरान भीड़ में किसी व्यक्ति का पैर उनके टखने पर पड़ने से उन्हें गंभीर चोट लग गई। दर्द बढ़ने पर वे 21 फरवरी को उपचार के लिए भोपाल स्थित अपोलो सेज अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मयंक शर्मा ने एक्स-रे देखने के बाद इसे केवल सॉफ्ट टिश्यू इंजरी बताया और प्लास्टर या न्यूमैटिक कास्ट (एयर कास्ट) लगाने की सलाह दी। चूंकि उन्हें अगले ही दिन हवाई यात्रा कर चंडीगढ़ लौटना था, इसलिए डॉक्टर ने न्यूमैटिक कास्ट लगाने की सलाह दी। नोटिस के अनुसार हैरानी की बात यह रही कि अस्पताल की फार्मेसी में यह आवश्यक ऑर्थोपेडिक उपकरण उपलब्ध नहीं था। पीड़िता को डे-केयर यूनिट में व्हीलचेयर पर बैठाकर इंतजार करने के लिए छोड़ दिया गया। आरोप है कि इस दौरान उन्हें लंबे समय तक न तो उचित चिकित्सा सहायता दी गई और न ही तत्काल कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
करीब तीन घंटे बाद न्यूमैटिक कास्ट उपलब्ध कराया गया, लेकिन आरोप है कि यह मरीज के पैर के अनुसार सही साइज का नहीं था और अत्यधिक बड़ा था। कास्ट लगाने के बाद ही हिमानी मक्कड़ को चक्कर आने लगे और उनकी हालत बिगड़ गई। पीड़िता के अनुसार अगले दिन भोपाल से दिल्ली और फिर चंडीगढ़ की हवाई यात्रा के दौरान उन्हें कई बार बेहोशी का सामना करना पड़ा। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद स्थानीय ऑर्थोपेडिक डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि यह केवल सॉफ्ट टिश्यू इंजरी नहीं बल्कि हेयरलाइन फ्रैक्चर था। इससे अस्पताल में की गई जांच और उपचार पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अस्पताल प्रबंधन से लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग।


कानूनी नोटिस में कहा गया है कि अस्पताल की लापरवाही, गलत निदान, गलत साइज के कास्ट का उपयोग और समय पर उपचार न मिलने के कारण पीड़िता को शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ गंभीर मानसिक आघात भी झेलना पड़ा।
नोटिस में उपचार पर हुए खर्च की वापसी, यात्रा व्यय की भरपाई और 5 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही अस्पताल से लिखित माफी की भी मांग की गई है। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो मामले को उपभोक्ता आयोग और अन्य न्यायिक मंचों पर ले जाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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