मोहम्मद अफ़ान बने मिसाल, शौक और अकीदत से रखा रोज़ा
संवाददाता: शेख आरिफ।
सोहागपुर// रमज़ानुल मुबारक का पाक महीना शुरू होते ही सोहागपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में रूहानियत का माहौल कायम हो गया है। मस्जिदों में नमाज़ियों की तादाद में इज़ाफ़ा देखा जा रहा है और लोग रोज़ा, नमाज़, तरावीह तथा तिलावत-ए-कुरआन में मशग़ूल नज़र आ रहे हैं। उलमाओ के अनुसार रमज़ान रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना है, जिसमें एक नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। यह महीना इंसान को सब्र, परहेज़गारी और हमदर्दी का पैग़ाम देता है। रोज़ा भूख और प्यास के ज़रिये ग़रीबों के हालात का एहसास कराता है, जिससे समाज में भाईचारे और इंसानियत की भावना मज़बूत होती है। रमज़ान को तीन अशरों में तक़सीम किया गया है— पहला अशरा रहमत का, दूसरा मग़फिरत का और तीसरा जहन्नम से निजात का माना जाता है। इसी वजह से मुस्लिम समाज इस महीने में इबादत, दुआ और सदक़ा – खैरात में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है।
छोटे बच्चे भी रख रहे हैं रोज़े

इस बार बड़ों के साथ-साथ बच्चों में भी रोज़े को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। कई घंटे बिना खाना-पानी के रहने के बावजूद उनके चेहरों पर थकान या शिकन दिखाई नहीं देती। इस्लामिक विद्वानों के अनुसार बच्चों पर रोज़ा रखना फ़र्ज़ नहीं होता, जबकि बालिग और सक्षम मुसलमानों के लिए यह अहम फ़र्ज़ है। इसके बावजूद बच्चे शौक और दीनी जज़्बे के साथ रोज़ा रख रहे हैं। मस्जिद में नमाज़ के लिए बच्चे समय से पहले पहुंच रहे हैं और कुरान शरीफ़ की तिलावत भी कर रहे हैं। सोहागपुर निवासी सात वर्षीय मोहम्मद अफ़ान का कहना है कि उन्हें रोज़ा रखने में किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती। उनके मुताबिक रोज़ा और नमाज़ से सुकून और शांति मिलती है और रमज़ान में इबादत करते हुए दिन कब गुजर जाता है, इसका एहसास ही नहीं होता।
शहर के इमामों ने लोगों से अपील की है कि इस बा-बरकत महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, जरूरतमंदों की मदद करें और आपसी भाईचारा कायम रखें।
