सोहागपुर: गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण की शुरुआत।

सोहागपुर।संवाददाता:- शेख आरिफ।

सतपुड़ा से पांच गौर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए किए गए स्थानांतरित

सोहागपुर// वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गौर (इंडियन बाइसन) पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत द्वितीय चरण के प्रथम दिवस, आज 22 जनवरी 2026 को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना परिक्षेत्र से कुल पांच गौरों को सुरक्षित रूप से पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किया गया। इन गौरों में एक नर एवं चार मादा शामिल हैं।वन विभाग द्वारा तैयार की गई सुव्यवस्थित कार्ययोजना के तहत सभी गौरों को ट्रेंकुलाइजेशन तकनीक से नियंत्रित कर विशेष रूप से तैयार ट्रकों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया। स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया के दौरान वन्य प्राणी चिकित्सकों, अनुभवी वन अधिकारियों एवं फॉरेस्ट स्टाफ की टीम लगातार गौरों के स्वास्थ्य, व्यवहार और सुरक्षा पर निगरानी रख रही है।

रेंजर राहुल उपाध्याय ने बताया, इस पुनर्स्थापना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्राकृतिक शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ाना है, जिससे वहां के बाघों एवं अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक शिकार आधार मजबूत हो सके और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित रहे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व प्रथम चरण में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 23 गौरों का सफलतापूर्वक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में स्थानांतरण किया जा चुका है, जिनका स्वास्थ्य सामान्य है और वे नए आवास में अनुकूलन की प्रक्रिया में हैं।

गौर (इंडियन बाइसन) के बारे में:- गौर को भारतीय बाइसन भी कहा जाता है और यह भारत का सबसे बड़ा जंगली गौवंश माना जाता है। एक वयस्क नर गौर का वजन 800 से 1,000 किलोग्राम तक हो सकता है। यह मुख्य रूप से घास, पत्तियां और वनस्पतियां खाता है और आमतौर पर झुंड में रहना पसंद करता है। गौर जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह वनस्पति संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ बड़े शिकारी जीवों के लिए प्रमुख शिकार प्रजाति भी है।वन विशेषज्ञों के अनुसार, गौरों की उपस्थिति से किसी भी टाइगर रिजर्व की जैव विविधता, शिकार श्रृंखला और जंगल की प्राकृतिक मजबूती बढ़ती है।वन विभाग ने आशा जताई है कि द्वितीय चरण के अंतर्गत आगे भी चरणबद्ध तरीके से गौरों का स्थानांतरण किया जाएगा, जिससे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का वन्यजीव तंत्र और अधिक सुदृढ़ होगा।

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